*श्री गीता मानस आरती *
आरति श्री गीतमानस की /
ब्रह्मरूप रसकाव्य कलश की //
गावत कृष्ण व्यास मुनि नारद /
परमब्रह्मज्ञाता, सुर , शारद //
ज्ञानयोग विज्ञान विशारद /
तृप्तिदायिनी ज्ञान तरस की //१//
परमब्रह्मविद्या भव तारिणि /
राग , द्वेष , मद ,मोह निवारिणि //
निर्मल,हरिहियकमल विहारिणि/
शास्त्र स्वामिनी राजरहस की //२//
तत्वज्ञान विज्ञान प्रकाशिनि /
पावनपरम सकल भ्रम नाशिनि //
कलिमल हरनि योगजिज्ञासिनि /
मोक्षदायिनी अदभुत रस की //३//
समता त्याग विराग विकाशिनि /
श्रद्धामय मानस मन्दाकिनि //
सार्वभौम आधात्म प्रकाशिनि /
अभिप्रेरक अद्वैत दरश //४//
योगरहस्य ताप त्रय हारी /
संत योगियों की हितकारी //
जनमानस अन्तर-तमहारी /
मन मधुकर के ह्रदय सरस की //५//
डॉ.पं उदय भानु तिवारी ''मधुकर''
No comments:
Post a Comment