श्री सदगुरुदेवाय नमः
//अनंत श्री विभूषित परमहंस स्वामीअड़गदानन्दजीमहाराज//
गुरु वंदना
गुरु बिनज्ञान न कोई पावे / बिना ज्ञान वैराग्य न आवे //
सो सदगुरु श्री पद्मपरागा / वन्दहुँ प्रथम सहित अनुरागा//
गुणागार गुरु ज्ञान प्रकाशा / दे सतसंगति रखहु सकासा//
कर यथार्थ गीतामृत पाना/जिय निज मानसगुरु पहचाना//
ज्ञान प्रकाश किरण गुरु दीजै / चित्त ब्रह्म में स्थित कीजै//
ब्रह्म ज्ञान में चित अनुरागे/ निर्गुण पंथ मोहिं प्रिय लागे//
जेहि गुरु कृपा दृष्टि मिल जाये/मोह निशा से सो जग जाये//
स्वामी अड़गड़ नाम अनूपा / हे गुरु देवा ब्रह्म स्वरूपा//
ब्रह्म ध्यानमय सदगुरु स्वामी/ कृपासिंधु हे अन्तर्यामी//
तुम बिन यह भव सिंधु अगाधा / पार न पाऊँ उपजे बाधा//
गुरुवर चरण शरण में लीजै /भव से मुक्ति मन्त्र मोहिं दीजै//
मंगल मूरति छवि हिय भाई/ प्रभु दरशन अमोघ फल दाई//
तव यथार्थ गीता कृति पाई /काव्यसरित हियसे झिरआई//
गीता मानस जेहि कर नामा/ सो भवतारिणि मातु प्रणाम//
दोहा
पूरणकर गुरु वंदना , निज मन मुकुर सुधारि/
हिय बन्दहुँ पुनि जगदगुरु , महादेव त्रिपुरारि//
करहु कृपा ह्रद-सरिकमल, विकसै पाय प्रकाश/
''उदय भृंग'' मकरंद रस , पियै कटैं भाव पाश//
पं० उदयभानु तिवारी "मधुकर"