ॐ
श्री परमात्मनेनमः
मंगलाचरण
दोहा
करहुँ वंदना ध्यान धर, बुद्धि निधान गणेश/
थाम रहाहूँ लेखनी ,हरहु विघ्न, भम, क्लेश//
सुमिर बुलाऊँ शारदे , मति मेरी नादान /
काव्य कलश के ज्ञान से,माँ मैं हूँ अनजान//
अगम काव्य के सिन्धु में,शब्द चयन का ज्ञान/
मुझ को आय कराइये , रहकर अन्तर्ध्यान//
तत्त्वज्ञान के सरित की ,पवन निर्मल धार /
मेरे ह्रदय बहाइये , भर गीता का सार //
भगवद् गीता ज्ञान का , कृष्णार्जुन संवाद /
छन्द बद्ध करने चला , कीजै अन्तर्नाद//
गुरु पितु मातु सुमीत तुम,वासुदेव हे नाथ /
पथ दर्शक बन नित्य हरि ,रहिये मेरे साथ //
दिव्यज्ञान की ज्योति प्रभु , मुझको करें प्रदान/
पुलकित तन मन कर रहा, हर क्षण तव गुण गान//
सर्व देव सुमिरन करहुँ ,सब मिलि होहु सहाय /
गीत कलश में सिंधु सा , गीता काव्य समाय //
बन्दहुँ सब करजोरिजुग,प्रेत,पितर,गन्धर्व /
चलें झूमती रागनी , रहहु सहायक सर्व //
चौपाई
बहकर चली ज्ञान की गंगा / कर स्नान मोह हो भंगा//
उघरें पटल भगतिपथ मतिके/ सुगम मार्ग हों तब सदगतिके//
जब हरि में यह मन अनुरागे/अन्तःकरणशक्ति तब जागे//
सुख दुःख दोनों कर्म धरोहर / पुण्यकर्म सत्कर्म मनोहर //
कर्म क्षेत्र की भूमि यही है / वेदशास्त्र ने बात कही है //
जैसा कर्म करेगा प्राणी / वैसी होय बुद्धि, मन , वाणी //
दोहा
जब जब पाप पहार से, बढे भूमि का भार/
हर युग में भगवान हरि , लेते हैं अवतार //
धर्मयुद्ध रणक्षेत्र में , कर अधर्म का नाश /
ज्ञान ज्योति से विश्व में ,करते धर्म प्रकाश//
तासु प्रकाशित ज्योति से,लेकर विमल प्रकाश//
निज कृति में भरने चला , पूरण कीजै आश//
हे माँ शारद ह्रदय समाजा / वरदहस्त दे भाव जगाजा//
चौपाई
नहिं कवि प्रवर न चतुर कहाऊँ/काव्यकलश धर तुम्हें मनाऊँ//
हे माँ शारद ह्रदय समाजा / वरद हस्त दे भाव जगाजा//
ऋद्धि सिद्धि सँग हे गण राजा / आ जाओ हों पूरण काजा//
काव्यकठिन प्रभु कलम चलाओ/गीतामानस आ लिखवाओ//
बुद्धि परे यह ज्ञान पुनीता / मैं अज्ञानी भाव विनीता//
प्रभु पद पंकज रज धरि शीशा/सुमिरहुँ ज्ञान निधान कपीशा//
पंथ प्रदर्शक तुम तुलसी के / दिग्दर्शक तुम भक्तिवशी के//
अर्जुन रथ की ध्वजा समाये/ प्रभु उपदेश श्रवण में आये//
सो गीता अमृत उपदेशा / ध्वनि गूँजे मम ह्रदय प्रदेशा//
हे कपि हिय में आन समाओ / गीता मानस पूर्ण कराओ//
दोहा
देव,दनुज,नर,किन्नरहिं , कहहुँ युगल कर जोरि//
क्षमहु दोष मम छन्द के,समझ मन्द मति मोरि//
पं० उदयभानु तिवारी "मधुकर"
No comments:
Post a Comment