आवाहन
सोरठा
सिद्धि सुमिरतहिं होय, सर्व रूप निर्गुण सगुण /
बुद्धि विनायक सोइ , भक्त हेतु प्रगटहिं भुवन //
शक्ति विभूति निधान,विमल बुद्धि शुभ गुण सदन /
करहिं जासु गुण गान , वेद , शारदा , देवगण /
सो योगेश्वर रूप , ब्रह्म सच्चिदानंदघन /
ह्रदय बसहु सुर भूप , शंख , चक्र , गद ,पद्म धर //
अदभुत रूप निहार , करूँ वन्दना ध्यान धर /
द्रवहु विश्व करतार , विनवहुँ प्रभु कर जोरिकर //
मोपर कीजै छोहु , नर नारायण पार्थ हरि /
कबहुँ घटै जनि नेहु , मागहुँ गहि पद पंकरुह //
बन्दहुँ मुनिपदकंज , सिद्ध शिरोमणि व्यास मुनि /
भगवत गीता दीन्ह , भव तारणि कलिमल हरनि //
बन्दहुँ सदगुरुदेव , पदपंकज रज शीश धरि /
रचवायहु गुरुदेव , गीता मानस जगत हित //
प्रणवहुँ पवन कुमार , भक्त शिरोमणि ज्ञान निधि /
विमल बुद्धि आधार , काव्यरूप कलिमल दहन//
दोहा
विश्वरूप भूदेव सब,निज निज अासन लेहु /
वरणहुँ,गीता ज्ञान अब,विमल बुद्धि वर देहु//
No comments:
Post a Comment