Monday, May 4, 2015

                                    ॐ 
                        श्री सदगुरुदेवाय नमः
        //अनंत श्री विभूषित परमहंस स्वामीअड़गदानन्दजीमहाराज//
                 गुरु वंदना 
गुरु बिन ज्ञान  न  कोई  पाये  / बिना  ज्ञान  वैराग्य  न आये //
सो  सदगुरु  श्री  पद्मपरागा / वन्दहुँ  प्रथम  सहित  अनुरागा //
गुणागार गुरु   ज्ञान  प्रकाशा / दे  सतसंगति  रखहु  सकासा //
कर यथार्थ गीतामृत पाना / जिय निज  मानसगुरु पहचाना //
ज्ञान  प्रकाश  किरण  गुरु  दीजै / चित्त ब्रह्म में  स्थित  कीजै //
ब्रह्म  ज्ञान में  चित  अनुरागे/ निर्गुण पंथ मोहिं  प्रिय  लागे //
जेहि गुरुकृपा दृष्टि मिल जाये/  मोह निशा से सो जग जाये //
स्वामी  अड़गड़   नाम  अनूपा /  हे गुरु  देवा  ब्रह्म  स्वरूपा //
ब्रह्म ध्यानमय सदगुरु स्वामी / कृपासिंधु    हे   अन्तर्यामी //
तुम बिन यह भव सिंधु  अगाधा / पार न पाऊँ उपजे बाधा //  
गुरुवर चरण शरण में लीजै / भव से मुक्ति मन्त्र मोहिं दीजै //
मंगल मूरति छवि हिय भाई / प्रभु दरशन अमोघ फल दाई //
तव यथार्थ गीता कृति पाई / काव्यसरित हियसे झिरआई //
गीता मानस जेहि कर नामा / सो भवतारिणि मातु प्रणाम //

दोहा;-     
पूरणकर गुरु वंदना , निज  मन मुकुर सुधारि /
हिय बन्दहुँ पुनि जगदगुरु , महादेव  त्रिपुरारि //
करहु कृपा ह्रद-सरिकमल, विकसै पाय प्रकाश /
''उदय भृंग'' मकरंद रस , पियै  कटैं भाव पाश //    

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