Tuesday, May 5, 2015

            प्रथमसंस्करण में मनीषियों के आशीर्वचन 
दोहा;- 
''श्रीकृष्ण   भाषित   यही , आत्मतत्व   का  ज्ञान /
 आभूषित  रस , छन्द   से ,  नव  रस  रत्न  महान //
परमब्रह्म   परमात्म   ने ,  कृपा   प्रकाश   दिखाय /
गीता   मानस   में   दिया  अदभुत   रस  बरसाय //
पढ़ यह अनुपम काव्य कृति,होकर अति अभिभूत / 
देते  आशिष  मुदित  मन , आत्मस्थित  अवधूत //''

                                      प्रकाश वन अवधूत 
                       श्री शैलेश्वरधाम शैलवारा,सिहोरा,जबलपुर   

           ''ऐसे सर्वश्रेष्ठ ग्रन्थ का पद्यानुवाद मानस  की  शैली  में प्रणीत कर सर्व साधारण के लिये सुगम बनाया है , मानस  की तरह ज्ञेय है /आपके इस प्रयास के लिये मैं अपनीशुभकामनायें
 प्रेषित करता हूँ और पाठकों के बीच  अधिकाधिक  प्रसार  के  लिये भगवान से प्रार्थना करता हूँ / शेष ईश्वरेक्षा सर्वोपरि / ''

                   स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि जी महाराज
              ( निवृत्त जगद् गुरु शंकराचार्य ,ज्योतिर्मय शाखा )  
                                भारत माता मन्दिर 
                      समन्वय कुटीर ,सप्त सरोवर ,हरिद्वार 

      ''पं. उदयभानु तिवारी 'मधुकर ' ने  उपनिषदों  के  सारभूत गीतारूपी  नवनीत  का  आस्वादन लोकभाषा  के  माध्यम से सामान्य जन  को  भी  कराने  का  पुण्य कार्य किया है / दोहा चौपाई आदि छन्दों में निबद्ध  यह  गीता मानस श्रीरामचरितमानस  की  शैली  में  लिखी  गई  है , जो लोगों  की न केवल आध्यात्मपिपासा  को ही शान्त  करेगी बल्कि उनकी बल्कि उनकी दैनन्दिन समस्याओं के समाधान का मार्ग भी प्रशस्त करेगी / ''

        महामंडलेश्वर श्रीमहंत स्वामी रामचन्द्रदास जीमहाराज  
                                 नरसिंह पीठाधीस्वर
                  श्री नृसिंह मन्दिर ,शास्त्री ब्रिज ,जबलपुर   

           ''इसी  अनादि - अविच्छिन्न  तथा  स्वाभाविक  परम मांगलिक क्रम में सम्पूर्ण वैदिक वाङ्गमय की सारभूता श्रीमद् भगवद् गीता का प्राकट्य 'गीता मानस  के  रूप  में  हुआ  है / जिसका सम्पूर्ण कलेवर चौपाई ,दोहा एवं छन्दों से रामचरित मानस के  समान  ओत -प्रोत  है /  इस  अनुपम  प्राकट्य  से  अब  गीता मानस सर्वजन सुलभ -सुग्राह्य एवं व्यापक रूप में मुमुक्षु जनों के लिए वरदान सिद्ध होगी / यद्यपि भगवद् गीता के  अन्यान्य  भी  पद्यात्मक  एवं   गद्यात्मक  अनुवाद  तथा व्याख्यान हुए हैंजो  श्लाघनीय  तथा उपादेय हैं परन्तु यह तो मानस के समान चौपाई, दोहा  एवं  छन्दों में  संग्रथित होने के कारण बेजोड़ है / जैसे मानस  की सहजता, सरसता,अनुपम प्रेरकता अद्वितीय है,वैसा ही लाभ मानवता को''गीता मानस''के द्वारा प्राप्त होगा, ऐसा मेरा परम  विश्वास तथा सर्वावतारी भगवान श्रीराम जी के चरणों में प्रार्थना भी है /

                            डॉ.स्वामी श्रीरामनरेशाचार्य जी महाराज 
                                    श्रीमठ ,पंचगंगा ,वाराणसी 

                  ''गीता मानस की रचना कर पं.उदयभानु तिवारी '' मधुकर ''ने बड़ा पुनीत कार्य किया  है / गीता  के  गूढ़  तत्वों  को  उन्होंने बहुत ही सहज,सरल छन्दों में निबद्ध कर गेयरूप 
में प्रस्तुत किया है / ''

                                  डॉ. स्वामी श्यामदास जी महाराज 
                                           गीता धाम, जबलपुर  

        ''गीतामानस में कवि ने भगवान श्रीकृष्ण जी की सरस,सहज  और  प्रभावपूर्ण   अभिव्यक्ति  को   सरल   हिन्दी   में तुलसीकृत श्रीरामचरित मानस की  भाँति  जन-जन के हृदय तक  पहुँचाने का  जो  कार्य किया  है वह प्रशंसनीय है / रस, छन्द स्वर ,लय , ताल की  अधिष्ठात्री माँ  शारदा अपने  इस लाडले पुत्र पर अपनी अहैतुकी कृपा सदा सर्वदा बनाये रखें / ''             
                                  
                                  स्वामी मुकुन्ददास जी महाराज 
                                           स्वयं-भू सिद्धपीठ 
                              श्री गुप्तेश्वर महादेव मन्दिर ,जबलपुर 

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