Sunday, May 3, 2015

                               श्रीकृष्ण स्तुति
सवैया;- 
मात पिता अरु ,बन्धु  तुम्हीं,तुमही गुरुदेव  सुमीत  हमारे /
श्रेष्ठ तुम्हीँ सब देवन  में, सर्वज्ञ  हे  देवकी  नन्दन   प्यारे //
तारनहार   तुम्हीं   सबके ,  श्रीकृष्ण  सुदर्शनचक्र   सम्हारे /
आन बसो हिय में विकसैं  ,सब पंकज भाव प्रकाश तुम्हारे //

दोहा;-
अटल नीति दृढ़ प्रीति  की ,  मूर्ति  द्धारकाधीश /
करहुँ तुम्हें शत शत नमन, विश्वदीप्ति  सुर ईश //
विद्या, बुद्धि, विवेक तुम , तुम्हीं  द्रविण करतार /
जय  जय  जय हे  जगतपति , कीजै  भव  से पार //

                        पं० उदयभानु तिवारी "मधुकर"

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