प्रार्थना
दोहा;-
जय जय जय हे जगदगुरु,शक्ति विभूति निधान /
ज्योतिपुञ्ज आनंदमय , वासुदेव भगवान //
चौपाई;-
तुमही आदि पुरुष भगवंता / अगुन अनीह अनूप अनन्ता //
तत्त्वरूप व्यापक अवनाशी/अजम् अनादि सकल सुखराशी //
एकाक्षर ओंकार स्वरूपा / निर्विकार अव्यक्त अरूपा //
सब ब्रह्माण्ड लोक के स्वामी / विश्वरूप हे अन्तर्यामी //
तुमही परमब्रह्म परमेश्वर / तुमही ब्रह्मा , विष्णु , महेश्वर //
तुमही जग के उद्भव कर्ता / धारक , पालक अरु संहर्ता//
सब हिय स्थित हे अखिलेश्वर/ करहुँ प्रणाम तुमहिं योगेश्वर//
दिव्य प्रकाश ह्रदय में कीजै / ब्रह्मज्ञान रस से भर दीजै//
पत्र,पुष्प,फल करके अर्पण /कर यह जीवन तुमहिं समर्पण//
ॐ ॐ जप ध्यान लगाऊँ / सगुन स्वरुप ह्रदय में ध्याऊँ//
दोहा;-
नाम पुष्प बहु आपके , उनमें ॐ महान /
पी पी मधुकर अमिय रस,करे नित्य गुण गान //
हिय दर्शन की आश प्रभु,पुनि पुनि करहुँ निहोर /
भक्त जानि सदगुरु करहु , पूर्ण मनोरथ मोर /
जग जन्मूँ जब लगि तुमहिं , पाऊँ गुरु के रूप /
पाजाऊँ प्रभु अन्त में , तव अव्यक्त स्वरुप //
उदयभानुतिवारी ''मधुकर''
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