Sunday, May 3, 2015

                                प्रार्थना
दोहा;-
जय जय जय हे जगदगुरु,शक्ति विभूति निधान /
ज्योतिपुञ्ज     आनंदमय  , वासुदेव   भगवान //

चौपाई;- 
तुमही  आदि पुरुष भगवंता  / अगुन अनीह अनूप अनन्ता //
तत्त्वरूप व्यापक अवनाशी/अजम्  अनादि सकल सुखराशी //
एकाक्षर  ओंकार   स्वरूपा  /  निर्विकार    अव्यक्त   अरूपा //
सब  ब्रह्माण्ड   लोक  के  स्वामी  /  विश्वरूप  हे  अन्तर्यामी //
तुमही  परमब्रह्म  परमेश्वर / तुमही  ब्रह्मा ,  विष्णु , महेश्वर //
तुमही  जग  के  उद्भव  कर्ता / धारक , पालक अरु संहर्ता//
सब हिय स्थित हे अखिलेश्वर/ करहुँ प्रणाम तुमहिं योगेश्वर//
दिव्य   प्रकाश  ह्रदय  में  कीजै  / ब्रह्मज्ञान  रस से भर दीजै//
पत्र,पुष्प,फल करके अर्पण /कर यह जीवन तुमहिं समर्पण//
ॐ ॐ जप ध्यान लगाऊँ / सगुन स्वरुप  ह्रदय  में  ध्याऊँ//

दोहा;-
नाम   पुष्प   बहु   आपके ,  उनमें   ॐ  महान /
पी पी मधुकर अमिय रस,करे नित्य गुण  गान //
हिय दर्शन की आश प्रभु,पुनि पुनि करहुँ निहोर /
भक्त  जानि  सदगुरु  करहु , पूर्ण  मनोरथ  मोर /
जग  जन्मूँ जब लगि  तुमहिं , पाऊँ  गुरु के रूप /
पाजाऊँ  प्रभु अन्त   में ,  तव  अव्यक्त  स्वरुप //           
    
                                       उदयभानुतिवारी ''मधुकर''

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